हिंदी कविता

अब क्या फायदा

रात आयी अगर रुकने मेरे यहॉ,
चिरागो को जलाने से क्या फायदा ॥
जिंदगी के बाद मौत लिखी ही है,
घुटके घुटके मरने से क्या फायदा ॥
दर्दे दिलको जो अबतक सवॉरा है,
सूखे ऑसु भुलाने से क्या फायदा ॥
जिंदगी ने दामन जो छोडा ही है,
मौतको अब रुकाने से क्या फायदा ॥
दिल मे दिलभी नही, दर्दे दिल भी नही,
ऐसे दिल को लगाने से क्या फायदा ॥
ख्वाब मे ही अगर हमको रखा नही,
आमने सामने से अब क्या फायदा ॥
रोकने के लिये अब ना आये कोई,
जाम को रोकने से अब क्या फायदा ॥
                           
मधुसूदन (मदन) पुराणिक
मोबा.9403194400

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